Damru Bajaya – ऐसा डमरू बजाया भोलेनाथ ने सारा कैलाश पर्वत मगन हो गया (Hansraj Raghuwanshi) Lyrics

Damru Bajaya Is Shivratri Special Mahadev Bhajan Sung By Hansraj Raghuwanshi. This Song Is Written By Hansraj Raghuwanshi While Music Also Composed By Hansraj Raghuwanshi. It’s Released By Hansraj Raghuwanshi Youtube Channel.


Aisa Damru Bajaya Bholenath Ne (Hindi)

मैं हिमाचल की बेटी

मेरा भोला बसे काशी

सारी उमर तेरी सेवा करुँगी

सारी उमर तेरी सेवा करुँगी

बनकर तेरी दासी


शम्भू

शिव शिव शिव शिव शम्भू

शिव शिव शिव शिव शम्भू

ऐसा डमरू बजाया भोलेनाथ ने

सारा कैलाश पर्वत मगन हो गया

बम बम ! बम बम !

ऐसा डमरू बजाया भोलेनाथ ने

सारा कैलाश पर्वत मगन हो गया

बम बम ! बम बम !

सारा कैलाश पर्वत मगन हो गया

सारा कैलाश पर्वत मगन हो गया

सारा कैलाश पर्वत मगन हो गया

सारा कैलाश पर्वत मगन हो गया

ऐसा डमरू बजाया भोलेनाथ ने

सारा कैलाश पर्वत मगन हो गया


डमरू को सुन कर जी कान्हा जी आये

कान्हा जी आये संग राधा भी आये

बम बम ! बम बम !

डमरू को सुन कर जी कान्हा जी आये

कान्हा जी आये संग राधा भी आये

बम बम !

वहाँ सखियों का मन भी मगन हो गया

सारा कैलाश पर्वत मगन हो गया

ऐसा डमरू बजाया भोलेनाथ ने

सारा कैलाश पर्वत मगन हो गया


डमरू को सुन कर जी गणपत चले हैं

डमरू को सुन कर जी गणपत चले

गणपत चले संग कार्तिक चले

गणपत चले संग कार्तिक चले

वहाँ अम्बे का मन भी मगन हो गया

सारा कैलाश पर्वत मगन हो गया


डमरू को सुन कर जी रामा जी आये

बम बम ! बम बम !

डमरू को सुन कर जी रामा जी आये

रामा जी आये संग लक्ष्मण जी आये

मईया सीता का मन भी मगन हो गया

ऐसा डमरू बजाया भोलेनाथ ने

ऐसा डमरू बजाया भोलेनाथ ने

सारा कैलाश पर्वत मगन हो गया

बम बम ! बम बम !

शम्भू !


डमरू को सुन कर जी ब्रह्मा चले

यहाँ ब्रह्मा चले वहाँ विष्णु चले

डमरू को सुन कर जी ब्रह्मा चले

यहाँ ब्रह्मा चले वहाँ विष्णु चले

मैया लक्ष्मी का मन भी मगन हो गया

सारा कैलाश पर्वत मगन हो गया

ऐसा डमरू बजाया भोलेनाथ ने

सारा कैलाश पर्वत मगन हो गया


डमरू को सुन कर जी गंगा चले

गंगा चले वहाँ यमुना चले

बम बम ! बम बम !

डमरू को सुन कर जी गंगा चले

गंगा चले वहाँ यमुना चले

वहाँ सरयू का मन भी मगन हो गया

ऐसा डमरू बजाया भोलेनाथ ने


डमरू को सुन कर जी सूरज चले

सूरज चले वहाँ चंदा चले

बम बम ! बम बम !

डमरू को सुन कर जी सूरज चले

सूरज चले वहाँ चंदा चले

सारे तारों का मन भी मगन हो गया

ऐसा डमरू बजाया भोलेनाथ ने

ऐसा डमरू बजाया भोलेनाथ ने

सारा कैलाश पर्वत मगन हो गया

शम्भू !

शम्भू !

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